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सवाल:- मरने के बाद जिन्दा होने का मतलब क्या है ❓
जवाब:- मरने के बाद जिन्दा होने का मतलब यह है कि
कियामत के दिन जब जमीन, आसमान, इन्सान और फ़रिश्ते वगैरा सब फ़ना हो जाएंगे तो फिर खुदायेतआला जब चाहेगा हज़रते इसराफील अलैहिस्सलाम को जिन्दा फ़रमाएगा वह दोबारा सूर फूकेंगे तो सब चीजें मौजूद हो जाएंगी।
फ़रिश्ते और आदमी वगैरा सब जिन्दा हो जाएंगे मुरदे अपनी अपनी कबरों से उठेगे, हश्र के मैदान में खुदायेतआला के सामने पेशी होगी, हिसाब लिया जाएगा और हर शख्स को अच्छे बुरे कामों को बदला दिया जाएगा यानी अच्छों को जन्नत मिलेगी और बुरों को जहन्नम में भेज
दिया जाएगा।
हिसाब और जन्नत व दोजख हक हैं उनका इन्कार करने वाला काफ़िर है।
📕 अनवारे शरीअत, पेज: 17-18
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🖌पोस्ट क्रेडिट - शाकिर अली बरेलवी रज़वी व अह्-लिया मोहतरमा
📌 इस किताब के दिगर पोस्ट के लिए क्लिक करिये -
https://Gausulwara.blogspot.com/
सवाल:- मरने के बाद जिन्दा होने का मतलब क्या है ❓
जवाब:- मरने के बाद जिन्दा होने का मतलब यह है कि
कियामत के दिन जब जमीन, आसमान, इन्सान और फ़रिश्ते वगैरा सब फ़ना हो जाएंगे तो फिर खुदायेतआला जब चाहेगा हज़रते इसराफील अलैहिस्सलाम को जिन्दा फ़रमाएगा वह दोबारा सूर फूकेंगे तो सब चीजें मौजूद हो जाएंगी।
फ़रिश्ते और आदमी वगैरा सब जिन्दा हो जाएंगे मुरदे अपनी अपनी कबरों से उठेगे, हश्र के मैदान में खुदायेतआला के सामने पेशी होगी, हिसाब लिया जाएगा और हर शख्स को अच्छे बुरे कामों को बदला दिया जाएगा यानी अच्छों को जन्नत मिलेगी और बुरों को जहन्नम में भेज
दिया जाएगा।
हिसाब और जन्नत व दोजख हक हैं उनका इन्कार करने वाला काफ़िर है।
📕 अनवारे शरीअत, पेज: 17-18
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